अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए एक बड़ा अभियान
उत्तराखंड में सरकारी ज़मीनों पर अवैध कब्ज़े के ख़िलाफ़ प्रशासन अब पूरी तरह से एक्शन में है। ज़िलाधिकारी के कड़े निर्देशों के बाद, सिंचाई विभाग की ज़मीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया गया है। गूलरभोज में प्रशासन की सख्ती का असर साफ़ दिखाई दिया, जहाँ कब्ज़ाधारियों ने स्वयं ही अपने अवैध निर्माण हटाने शुरू कर दिए हैं।
बिजली के कनेक्शन भी काटे गए-
यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब पूर्व में दिए गए नोटिस की अवधि समाप्त हो गई। प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में, सबसे पहले मुनादी कराई गई। इसके तत्काल बाद, विद्युत विभाग की टीम ने सभी चिन्हित अवैध बिजली कनेक्शन काट दिए।
29 नवंबर को हरिपुरा जलाशय से अतिक्रमण हटाया जाएगा
प्रशासन के इस सख़्त रुख़ और शांतिपूर्ण कार्रवाई को देखते हुए, अवैध निर्माण करने वालों ने विरोध की जगह सहयोग करना चुना और ख़ुद ही अपने आशियाने ढहाने लगे। बताया जा रहा है कि आज ही कई घरों से सामान हटा लिया गया है।हालांकि, यह अभियान अभी रुका नहीं है। प्रशासन ने साफ़ कर दिया है कि कार्रवाई जारी रहेगी। अगली बड़ी कार्रवाई 29 नवंबर को हरिपुरा जलाशय की भूमि पर की जाएगी।
इस पूरे अभियान के दौरान, पुलिस प्रशासन, सिंचाई विभाग, विद्युत विभाग और जल संस्थान की टीमें मुस्तैद रहीं, जिससे पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
जिलाधिकारी का सख्त आदेश अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
गूलरभोज के ठंडा नाला इलाक़े में आज सुबह से ही गहमागहमी थी। मौक़े पर भारी पुलिस बल और प्रशासन की टीमें मौजूद थीं। ज़िलाधिकारी के सख़्त आदेश थे—सिंचाई विभाग की ज़मीन हर हाल में खाली कराई जाए।कार्रवाई की शुरुआत मुनादी से हुई। इसके बाद, बिना किसी देरी के, विद्युत विभाग की टीम ने उन सभी घरों के अवैध कनेक्शन काट दिए, जिन्हें पहले नोटिस दिया गया था।प्रशासन की इस सख़्ती और तैयारी को देखकर, अतिक्रमणकारियों को भी समझ आ गया कि अब नरमी नहीं बरती जाएगी। जो निर्माण वर्षों से खड़े थे, उन्हें लोग ख़ुद ही हटा रहे हैं। यह एक बड़ी जीत है प्रशासन के शांतिपूर्ण, लेकिन सख़्त रवैये की।शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल शुरुआत है। 29 नवंबर को हरिपुरा जलाशय पर इससे भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। सरकारी भूमि पर अवैध कब्ज़ा अब उत्तराखंड में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
रिपोर्ट-अर्जुन कुमार





