मायके में नाम, ससुराल में वोट?…SIR पर चुनाव आयोग की अनोखी पह
उत्तराखंड में जल्द ही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इससे पहले राज्य में प्री-एसआईआर चलाया जा रहा है, ताकि मतदाताओं को किसी तरह की परेशानी या भ्रम न हो। इसी को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने मतदाताओं की सहायता के लिए एक अनोखी पहल की है।
प्री-एसआईआर की शुरुआत के साथ ही प्रदेश में वोटर हेल्पलाइन नंबर 1950 जारी कर दिया गया है। इस नंबर पर कॉल कर मतदाता एसआईआर और वोटर लिस्ट से जुड़ी किसी भी शंका या जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। सभी जिलों में यह हेल्पलाइन सक्रिय कर दी गई है।
प्री-एसआईआर के दौरान राज्य सरकार ने लगभग 70 प्रतिशत मतदाताओं की मैपिंग का लक्ष्य रखा है। इसके लिए बूथ लेवल अफसर (बीएलओ) घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रहे हैं। इस दौरान यह सामने आया है कि वर्ष 2003 में दूसरे विधानसभा क्षेत्र में निवास करने वाले मतदाताओं की मैपिंग में दिक्कतें आ रही हैं। वहीं, शादीशुदा महिलाओं को अपने मायके की वोटर लिस्ट से नाम जुड़वाने या मैपिंग करवाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे कई मतदाता दुविधा में हैं।
मतदाताओं की समस्याओं के समाधान के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को हेल्प डेस्क स्थापित करने और हेल्पलाइन नंबर जारी करने के निर्देश दिए थे। इसके तहत जिलों में हेल्पलाइन नंबर 1950 को सक्रिय कर दिया गया है।
एसआईआर का उद्देश्य किसी व्यक्ति की एक वैध मतदाता के रूप में पात्रता की पुष्टि करना है। इस दौरान बीएलओ मतदाताओं के घर जाकर उनकी जानकारी का सत्यापन करेंगे और गणना फॉर्म वितरित करेंगे।
18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके नए पात्र मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में जोड़े जाएंगे। वहीं, मृत या स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के विवरण हटाए या अपडेट किए जाएंगे। साथ ही पता, फोटो और अन्य जानकारियों में जरूरी सुधार भी किया जाएगा।
